कृष्ण मोहन
उत्तर प्रदेश के गोंडा में अवैध रूप यूरिया का निर्माण किया जा रहा था, मामले की जानकारी मिलने पर जांच टीम द्वारा छापेमारी की गई, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही प्लांट में ताला जड़ दिया गया। मौके पर पहुंची टीम ने कमरे का ताला तोड़ कर भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की। जिसके बाद कमरे को सील कर दिया गया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मनकापुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत छपिया के सकदरपुर में अवैध रूप से डीईएफ (डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड) यूरिया निर्माण किए जाने की सूचना मिलने के बाद जिला कृषि अधिकारी एवं अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) सी.पी. सिंह ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर छापेमारी की, इस दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद हुई।
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| मकान, जिसमें चल रहा था प्लांट |
दो संदिग्ध से पूछताछ, लटकता मिला ताला
बताया जाता है कि छापेमारी टीम के पहुंचने से पहले ही अवैध यूरिया के कारोबारी ने प्लांट के मकान में ताला जड़ दिया। लेकिन प्लांट परिसर के बाहर चार सफेद कंटेनर और एक बड़ी काली पानी की टंकी ने यूरिया के अवैध निर्माण की पोल खोल दी। कंटेनर में भरे तरल द्रव्य से यूरिया की तेज गंध आ रही थी। जो यूरिया निर्माण की पुष्टि कर रहे थे। इस दौरान मौके पर दो संदिग्ध दुर्गेश और विजय मिले, पूछताछ करने पर दोनों ने बताया कि वह जनरेटर मिस्त्री है, किराए पर राकेश पांडे का जनरेटर लाया गया है, जिसमें तकनीकी खराबी आने के बाद मरम्मत करने के लिए उन्हें मौके पर बुलाया गया था।
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| सील करने की कार्रवाई |
टूटा ताला मिली यूरिया की बोरियां
छापेमारी टीम ने कार्रवाई करते हुए बभनान चौकी इंचार्ज घनश्याम वर्मा, और स्थानीय जनप्रतिनिधि (प्रधान रमेश मिश्र) को मौके पर बुलाकर उनकी मौजूदगी में बंद कमरे का ताला तोड़ दिया। कमरे के अंदर एचयूआरएल कंपनी की (यूरिया) 36 खाली बोरियां, फर्श पर बिखरा हुआ लगभग आधा किलो यूरिया मिला। इस दौरान छोटे-छोटे कंटेनरों में यूरिया के घोल बरामद हुए। कमरे के अंदर जांच टीम ने बस्ती में रजिस्टर्ड एक बाइक भी बरामद किया।
जांच में खुला राज, सील
जांच के दौरान पाया गया कि डीईएफ निर्माण में तकनीकी ग्रेड यूरिया के स्थान पर अनुदानित यूरिया का अवैध उपयोग किया जा रहा था। मौके पर बरामद सभी सामग्री को सील करके मकान मालिक एवं ग्राम प्रधान रमेश मिश्रा के सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान जांच टीम ने संदिग्ध राकेश पाण्डेय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला।
विभागीय मिलीभगत की बू
जांच टीम के पहुंचने से पहले मौके पर खाली बोरियां छोड़कर अवैध कारोबारी का गायब हो जाना, विभाग के गोपनीयता में सेंध होने की ओर इशारा कर रहा है, लोगों का मानना है कि जब यहां पर अवैध रूप से यूरिया का निर्माण हो रहा था, मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच टीम छापेमारी करने जा रही थी, तो उससे पहले ही संदिग्ध आरोपी माल सहित मौके से फरार हो गए, जिससे ऐसा लगता है कि निश्चित ही विभाग से कोई उनका सहयोग कर रहा है, हालांकि यह विभाग के जांच का अपना विषय है।
बोले जिला कृषि अधिकारी
मामले में जानकारी देते हुए जिला कृषि अधिकारी एवं उर्वरक अधिकारी सीपी सिंह ने प्रेस नोट के माध्यम से बताया कि विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अवैध तरीके से कोई भी कार्य नहीं होने दिया जाएगा। छापेमारी के दौरान उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7 का उल्लंघन पाया गया है।



