दुनिया सत्य की नहीं, शक्ति की सुनती है, और यह शक्ति तब जन्म लेती है जब समाज संगठित होता है।
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दुनिया सत्य की नहीं, शक्ति की सुनती है, और यह शक्ति तब जन्म लेती है जब समाज संगठित होता है।

पं श्याम त्रिपाठी/बनारसी मौर्या  तरबगंज गोंडा।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष जैसे ऐतिहासिक कालखंड में आज हमारे…