पट्टी, प्रतापगढ़ ! बेटियों को सशक्त व शिक्षित बनाना आज के समय की जरुरत है क्योंकि सशक्त बेटियाँ समृद्ध भारत का निर्माण करती हैं. उक्त विचार आज तरुण चेतना द्वारा आयोजित महामाया बालिका इंटर कालेज दीवानगंज में प्रधानाचार्य डॉ० शिव प्रताप सिंह ने व्यक्त किया. श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के सामने निरंतर मौजूद रहने वाली-लैंगिक भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या, बाल लिंगानुपात से जुड़ी चुनौतियों, बाल विवाह, तथा शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुँच में बाधाओं जैसी असमानताओं को दूर करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
समारोह की शुरुआत में आयोजक संस्था तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी ने कहा कि राष्ट्रीय बालिका दिवस बेटियों के अधिकारों को प्रोत्साहित करने, उन्हें सम्मान और समानता देने का उत्सव है जो हर साल 24 जनवरी को पूरे देश में मनाया जाता है, ताकि समाज और सरकार मिलकर बेटियों के अधिकार, उनके सपने और उनकी संभावनाओं को सम्मान दे सकें।
2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए इस दिवस का उद्देश्य लड़कियों को सशक्त बनाने और ऐसा माहौल बनाने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, जहां वे लैंगिक भेदभाव की बाधाओं के बिना आगे बढ़ सकें और पढ़ सकें । श्री अंसारी के अनुसार राष्ट्रीय बालिका दिवस बेटियों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक अवसर है.
इसी क्रम में ए.एच.टी थाना के प्रभारी संजय यादव ने बालिकाओं को उत्साहित करते हुए कहा कि बालिकाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी एवं सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम मे विद्यालय की छात्रा श्रेया तिवारी, प्रथा सिंह, संध्या सरोज ने भाषण के माध्यम से सक्रिय सहभागिता निभाई और बालिका शिक्षा और अधिकारों पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक हकीम अंसारी ने कहा कि राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा करने और उनका समाधान करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। इनमें बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसी क्रम मे तरुण चेतना के उप निदेशक श्याम शंकर शुक्ल ने कहा कि लड़कियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने, कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुद्दों को संबोधित करने, घटते लिंगानुपात के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बालिकाओं के लिए अधिक समावेशी और न्यायसंगत वातावरण को बढ़ावा देने पर मुख्य ध्यान दिया जाता है। मोदी सरकार ने 2015 में अपनी प्रमुख योजना ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य विभिन्न उपायों के माध्यम से बाल लिंग अनुपात को बढ़ावा देना और लड़कियों को सशक्त बनाना है।
कार्यक्रम के अंत में छात्राओं को बाल विवाह मुक्त भारत के अंतर्गत बाल विवाह के विरोध में शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर छात्राओं को डाबर का रियल जूस व वाटिका शैम्पू भी बाँटा गया।
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक सिद्धार्थ शुक्ल, मानसी सिंह, लक्ष्मी जायसवाल व जान्हवी जायसवाल सहित कई शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं तरुण चेतना संस्था से हुस्नारा बेगम, कलावती उपस्थित रही।




