बृजेश गुप्ता
श्रावस्ती जिला मुख्यालय भिनगा पर अधिवक्ता संघ ने यूजीसी के विरोध में सड़क पर उतरे और जोरदार नारे बाजी की, और कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपती को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, इस अवसर पर अधिवक्ताओं ने कहा कि
UGC की नई गाइडलाइनों अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी की गई नई गाइडलाइन राष्ट्र की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन गया है उन पर तत्काल रोक लगाई जाए, साथ ही पुनरीक्षण एवं संवैधानिक हस्तक्षेप किया जाए, UGC की नई गाइडलाइनों से देशभर के विश्वविद्यालयों, शिक्षकों, छात्रों एवं अभिभावकों में भय, असुरक्षा और असंतोष का माहौल बन गया है। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों, अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है।ज्ञापन में प्रमुख आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा गया कि नई गाइडलाइनों में शिकायत को ही प्राथमिक सत्य मानकर कार्रवाई की संभावना बनाई गई है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। बिना ठोस साक्ष्य किसी छात्र या शिक्षक की मंशा अथवा विचारधारा तय करना चयनित उत्पीड़न और वैचारिक दमन को बढ़ावा देगा। साथ ही झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर किसी प्रकार के स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान न होने से व्यवस्था के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई।
यह भी उल्लेख किया गया कि जब भारतीय न्याय संहिता (BNS), SC/ST एक्ट और विश्वविद्यालयों के आंतरिक अनुशासन नियम पहले से मौजूद हैं, तब समान प्रकृति की अतिरिक्त कठोर गाइडलाइनों का लागू होना शिक्षा सुधार के बजाय प्रशासनिक अतिरेक प्रतीत होता है। इससे विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और विमर्श के केंद्र न रहकर संदेह, निगरानी और आत्म-सेंसरशिप के केंद्र बनते जा रहे हैं।इस अवसर पर भारी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

