एकलब्य पाठक
ईसानगर खीरी:ईसानगर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत मटरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। गांव निवासी पवन पुत्र रमाकांत और अवधेश पुत्र रामकुमार, जो दोनों ही दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, आज भी पक्के आवास की आस लगाए जिम्मेदारों के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक कार्यालय तक कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। जबकि गांव में ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास आवंटित कर दिया गया जिनके पास पहले से जमीन, पक्का मकान और वाहन मौजूद हैं। यही नही
दिव्यांग पवन ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वह अधिकारियों के आगे पीछे घूमते-घूमते थक चुके हैं। उसका कहना है कि “हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि किसी की जेब गर्म कर सकें, इसी वजह से आज तक हमें आवास नहीं मिला।” साथ ही दोनों दिव्यांग युवकों ने बताया कि अब उनकी आखिरी उम्मीद मुख्यमंत्री जनता दरबार से है। किराए-भाड़े की व्यवस्था होते ही वह लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मिलकर आवास दिलाने की गुहार लगाएंगे। वही ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए, खासकर दिव्यांग और गरीब परिवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन दोनों असहाय युवकों की पीड़ा को कब तक नजरअंदाज करते हैं।

