वट वृक्ष की पूजा-अर्चना के दौरान मिट्टी के बर्तनों की भी खूब हुई बिक्री
कमलेश
खमरिया-खीरी। ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनिवार को ईसानगर क्षेत्र में सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर श्रद्धा एवं आस्था के साथ वट सावित्री व्रत रखा। रेहुआ, खमरिया, ईसानगर, कटौली, लाखुन समेत विभिन्न गांवों और कस्बों में महिलाओं ने वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।
सुबह से ही महिलाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। कई महिलाओं ने मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थित बरगद के पेड़ों की पूजा की, वहीं कुछ महिलाओं ने घरों में बरगद की डाल मंगाकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ व्रत एवं पूजन किया।
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| सुनीता मिश्रा |
महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर परिक्रमा की तथा कथा श्रवण कर पति की दीर्घायु की प्रार्थना की। पकरिया निवासी शिक्षिका सुनीता देवी मिश्रा ने बताया कि वट सावित्री व्रत में महिलाएं निर्जला उपवास रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सत्यवान की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सावित्री ने यमराज से संघर्ष कर अपने पति को पुनर्जीवन दिलाया था। तभी से सुहागिन महिलाएं इस व्रत को पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए करती आ रही हैं।
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| रुचि अवस्थी |
रुचि अवस्थी ने बताया कि हिंदू धर्म में वट वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इसी कारण वट वृक्ष को त्रिमूर्ति का प्रतीक माना जाता है। विशाल और दीर्घजीवी होने के कारण इसकी पूजा लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से की जाती है। साथ ही उन्होंने बताया कि हिंदू परंपरा में अक्षयवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट का विशेष महत्व है। प्रयागराज स्थित अक्षयवट को लेकर मान्यता है कि प्रलय काल में भी यह समाप्त नहीं होता। धार्मिक आस्था के चलते महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की।
मिट्टी के बर्तनों की रही भारी मांग
वट सावित्री व्रत के अवसर पर बाजारों में मिट्टी के बर्तनों की जमकर बिक्री हुई। पूजा में उपयोग होने वाले मिट्टी के पात्र, दीपक और अन्य सामग्री खरीदने के लिए महिलाओं की भीड़ दुकानों पर उमड़ी रही। इस बीच मिट्टी के बर्तन बेच रहे कुम्हार जयकुमार ने बताया कि इस पर्व से उन्हें अच्छा लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि वट सावित्री पर्व को देखते हुए करीब पंद्रह दिन पहले से ही मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया था। पर्व के दौरान हजारों रुपये के बर्तनों की बिक्री हुई, जिससे कुम्हार परिवारों में भी खुशी का माहौल है।



