कृष्ण मोहन
उत्तर प्रदेश के गोंडा में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अस्पताल प्रबंधक एवं चिकित्सक ने करुणा गौशाला में हरिशंकरी वृक्षारोपण किया। इसके अतिरिक्त परिसर में दर्जन भर से अधिक आम के उम्दा प्रजाति के पौधे लगाए।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मनकापुर कस्बे में संचालित एमएस अस्पताल के संचालक शांति भूषण त्रिपाठी एवं चिकित्सक मुस्कान त्रिपाठी ने पुत्र तेजस के साथ झिलाही बाजार के सिसवा गांव स्थित करुणा गौशाला में वृक्षारोपण किया। इस दौरान श्री त्रिपाठी ने हरिशंकरी वृक्षारोपण के नियम व फायदे का गहन वर्णन करते हुए लगाने के दौरान सावधानियां भी बताई।
हरिशंकरी वृक्षारोपण
श्री त्रिपाठी ने बताया कि पीपल, बरगद और पाकड़ को एक साथ निश्चित दूरी पर लगाया जाता है। जिसे हरिशंकरी कहते हैं, इन्हें त्रिवेणी का भी नाम दिया जाता है। उन्होंने बताया कि तीनों पौधे अपनी उम्र के साथ विशाल वृक्ष बनते हैं, उनकी उम्र सैकड़ों साल होती है। धार्मिक दृष्टि में इन्हें त्रिदेव का वास माना जाता है। वही तीनों वृक्ष वैज्ञानिक दृष्टि से ऑक्सीजन के महास्रोत हैं। पीपल से हमें 24 घंटे ऑक्सीजन मिलता है, तो वहीं बरगद और पाकड़ के पत्ते कार्बन डाइऑक्साइड को खुद में अवशोषित करके हवा को शुद्धता प्रदान करते है। यह तीनों वृक्ष इकट्ठे लगाना ऑक्सीजन की फैक्ट्री लगाने के बराबर है। इस दौरान डॉक्टर मुस्कान त्रिपाठी ने कहा कि तीनों वृक्ष विशाल व घने पत्तेदार होने के कारण से अपने नीचे तापमान की गिरावट करते हैं, जिससे पशु पक्षियों को आश्रय मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि इनके फलों से पंछियों और बंदरों को भोजन भी मिलता है।
हरिशंकरी वृक्षारोपण में सावधानियां
श्री त्रिपाठी ने बताया कि तीनों वृक्षों को एक साथ लगाने के दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मकान दुकान या गोदाम के पास कभी भी न लगाएं, अन्यथा यह वृक्ष बढ़ती उम्र के साथ अपने विस्तार के दौरान अपनी जड़ों को दूर तक फैलाते हैं, जिससे मकान या गोदाम की दीवारें फट सकती हैं। वृक्षारोपण के लिए हमेशा गौशाला, मंदिर, तालाब के आसपास के स्थान का चयन करना चाहिए।
लगाने का तरीका
इन्हें त्रिकोण आकार में लगाया जाता है, तीनों पौधों के बीच की दूरी सवा से डेढ़ फीट होती है, जिसमें बरगद के पौधे को पश्चिम, पीपल को उत्तर और पाकड़ को पूर्व दिशा में लगाया जाता है।
इनकी रही मौजूदगी
इस मौके पर करुणा गौशाला के संचालक विद्याधर शुक्ला, आदित्य, अजय, अटल आवासीय विद्यालय की शिक्षिकाएं मौजूद रही।


