पं श्याम त्रिपाठी/बनारसी मौर्या
नवाबगंज गोंडा। माझा क्षेत्र में कई दिनों से दहशत का कारण बने तेंदुए को आखिरकार ग्रामीणों ने साहस, एकजुटता और सूझबूझ का परिचय देते हुए पकड़ लिया। जैतपुर माझा ग्राम पंचायत के केवटहिया मजरे में गन्ने के खेत में छिपे तेंदुए को ग्रामीणों ने जाल बिछाकर दबोच लिया। सूचना पर पहुंची वन विभाग और पुलिस टीम ने तेंदुए को अपने कब्जे में लेकर पिंजरे में सुरक्षित बंद कर टिकरी रेंज कार्यालय पहुंचाया। तेंदुए के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
सोमवार शाम ग्रामीणों ने गांव के समीप गन्ने के खेत में एक तेंदुए को छिपा हुआ देखा। देखते ही देखते खबर पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। ग्रामीणों ने खेत की चारों ओर से घेराबंदी कर जाल बिछाया और हांका लगाया। काफी मशक्कत के बाद तेंदुआ जाल में फंस गया, जिसके बाद तत्काल वन विभाग और पुलिस को सूचना दी गई।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई दिनों से गांव और आसपास के क्षेत्रों से बकरियों के गायब होने की घटनाएं लगातार हो रही थीं। इससे लोगों को किसी जंगली जानवर की मौजूदगी का संदेह था। इसी आशंका के चलते ग्रामीण खेतों और बागों में निगरानी कर रहे थे। सोमवार को तेंदुआ दिखाई देने पर लोगों ने योजना बनाकर उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
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| पिंजरे में तेंदुआ |
सूचना मिलते ही टिकरी रेंज के रेंजर अभिषेक सिंह वन विभाग की टीम और पिंजरे के साथ मौके पर पहुंचे। वन कर्मियों ने तेंदुए को सुरक्षित पिंजरे में बंद कर टिकरी रेंज कार्यालय पहुंचाया। रेंज अधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ मादा है और उसकी उम्र लगभग चार वर्ष आंकी गई है। उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
वन विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय मेडिकल टीम ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उसे सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा।
ग्रामीणों की सतर्कता से टला बड़ा खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तेंदुए को नहीं पकड़ा जाता तो किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता था। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी और राहत का माहौल है।
माझा क्षेत्र में पहले भी मिलती रही है तेंदुए की दस्तक
नवाबगंज के माझा क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की खबरें पहले भी कई बार सामने आती रही हैं। करीब दो-तीन वर्ष पूर्व सेमराशेखपुर गांव में ग्रामीणों ने तेंदुआ देखने का दावा किया था। इसके अलावा तुलसीपुर माझा गांव में भी दो बार तेंदुआ दिखाई दिया था। एक बार तेंदुए ने एक युवक पर हमला करने का प्रयास किया, लेकिन युवक के शोर मचाने पर वह भाग निकला था। उस दौरान वन विभाग ने कई दिनों तक पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली थी।
चार वर्ष पहले हरिहरपुर गांव में टमाटर के खेत में भी तेंदुआ दिखाई दिया था। वन विभाग ने ड्रोन कैमरे और पिंजरे की मदद से उसकी निगरानी की, लेकिन इसी दौरान वह खेत से निकलकर एक युवक पर हमला कर फरार हो गया था। कटरा शिवदयालगंज क्षेत्र के फत्तेपुर गांव में भी तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिली थी, हालांकि वन विभाग को उसके ठोस साक्ष्य नहीं मिल सके थे।
ग्रामीणों का कहना है कि माझा क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की सूचनाएं वर्षों से मिलती रही हैं, लेकिन हर बार वन विभाग इनकार करता रहा। इस बार ग्रामीणों द्वारा तेंदुए को पकड़ लिए जाने के बाद उसकी मौजूदगी की पुष्टि हो गई है। फिलहाल तेंदुए के पकड़े जाने से क्षेत्र में फैली दहशत समाप्त होती नजर आ रही है।
मौके पर पहुंचे अधिकारी
डीएफओ अनुराग प्रियदर्शी, टिकरी रेंजर अभिषेक सिंह, जितेंद्र पांडे, अजय, रामकेश, योगेश मिश्रा, प्रवर्तन दल के अभिषेक वर्मा, अमित, वही चिकित्सकों की टीम में डॉ प्रभात कुमार गौतम, डॉ अनिल कुमार वर्मा, डॉ आशीष कुमार सिंह सहित स्टाफ के अन्य लोग मौजूद थे।



