अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर के पायनियर पब्लिक स्कूल एण्ड कालेज बलरामपुर में रविवार को ‘12वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस‘ मनाया गया।
21 जून को शहर के अग्रेंजी माध्यम विद्यालय पॉयनियर पब्लिक स्कूल एण्ड कॉलेज में ‘12वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस‘ मनाया गया । विद्यालय के प्रबन्ध निदेशक डा0 एम0पी0 तिवारी, उप प्रधानाचार्या उप प्रधानाचार्य शिखा पाण्डेय व राघवेन्द्र त्रिपाठी सहित उपस्थित सभी अध्यापक अध्यापिकाओं ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण कर पुष्प अर्पित किया। प्रबन्ध निदेशक डॉ0 एम0पी0 तिवारी ने मुख्य अतिथि रविकान्त मिश्रा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बलरामपुर को मोमेन्टो देकर व अंगवस्त्र पहनाकर हार्दिक स्वागत व अभिनन्दन किया। तत्पश्चात् आये हुए सम्मानित अतिथियों में रोहन तिवारी जिला संयोजक, अंबुज भार्गव जिला कार्यकारी समिति सदस्य, शिवांगी दूबे प्रांत कार्यकारिणी सदस्य, देशराज जिला सोशल मिडिया संयोजक, अविनाश पाण्डेय नगर मंत्री, आदित्य पाण्डेय सदस्य, आरती तिवारी सदस्य, अनामिका मिश्रा सदस्य, मो0 आरिफ सदस्य का हार्दिक स्वागत व अभिनन्दन किया। प्रबन्ध निदेशक व योगा अध्यापिका विजय लक्ष्मी पाण्डेय एवं रीतेश मिश्रा द्वारा छात्र-छात्राओं एवं अध्यापक अध्यापिकाओं को योगाभ्यास कराया गया । प्रबन्ध निदेशक ने समस्त छात्र छात्राओं को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ही इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया था। योग का अभ्यास एक बेहतर इंसान बनने के साथ एक तेज दिमाग, स्वस्थ मन और एक सुकून भरे शरीर को पाने के तरीकों में से एक है। योग अपने अदभुत स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2015 में आरंभ होने के बाद, हर साल 21 जून को मनाया जाता है। योग, मन, शरीर और आत्मा की एकता को सक्षम बनाता है। योग के विभिन्न रूपों से हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अलग-अलग तरीकों से लाभ मिलता है। योग, व्यायाम का ऐसा प्रभावशाली प्रकार है, जिसके माध्यम से न केवल शरीर के अंगो बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है। यही कारण है कि योग से शारीरिक व्याधियों के अलावा मानसिक समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है। पंतजलि के अनुसार योग के 8 सूत्र बताए गए हैं जिसमें यम, नियम, आसन प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि इसमें ध्यान की वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना शामिल है। इसके दो प्रकार है-सविकल्प और अविकल्प। अविकल्प में संसार में वापस आने का कोई मार्ग नहीं होता। अतः यह योग पद्धति की चरम अवस्था है। भगवद्गीता में योग के तीन प्रमुख प्रकार बताए हैं जिसमें कर्मयोग-इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मो का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। भक्ति योग- इसमें भगवत कीर्तन प्रमुख है। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों का सुझाया जाता है। ज्ञान योग-इसमें ज्ञान प्राप्त करना अर्थात ज्ञानार्जन करना शामिल है। योग दिवस पर छात्र-छात्राओं तथा अध्यापक अध्यापिकाओं ने सूर्य नमस्कार, वज्रासन, शशक आसन, चक्रासन, कटि आसन, त्रिकोणासन तथा प्राणायाम में अनुलोम विलोम, कपालभाति एवं भ्रामरी योगासन में बढ़चढ कर हिस्सा लिया। विद्यालय में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने योग दिवस में बढ चढ़ कर प्रतिभाग किया । विद्यालय के अध्यापक अध्यापिकाओं में मोहित मिश्रा, विश्वनाथ तिवारी, त्रिलोकीनाथ शुक्ला, अशोक कुमार शुक्ला, सौरभ शुक्ला, संदीप यादव, एल0पी0 तिवारी, अभिषेक जायसवाल, उमेश तिवारी, विजय शकर, कपिल निषाद, आकाश राय, उर्वशी शुक्ला, किरन मिश्रा, उमा तिवारी, नीलम श्रीवास्तव, रेशू तिवारी, पूनम चौहान, रीतू श्रीवास्तव, लता श्रीवास्तव, आकांक्षा मिश्रा, आयुशी सिंह, शालिनी शुक्ला एवं आराधना सिंह ने विभिन्न प्रकार के योगासान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।